NCERT Solutions Class 10 science chapter 2 in Hindi

NCERT Solutions Class 10 science chapter 2 in Hindi

Chapter 2  अम्ल, क्षारक एवं लवण 

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प्रश्न 1: आपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। इनमें से एक में आसवित जल एवं शेष दो में से एक में अम्लीय विलयन तथा दूसरे में क्षारीय विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिटमस पत्र दिया जाता है तो आप प्रत्येक परखनली में रखे गए पदार्थों की पहचान कैसे करेंगे?

उत्तर 1: अगर लाल लिटमस पेपर का रंग नीले रंग में बदल जाता है, तो यह एक क्षार है और अगर कोई रंग परिवर्तन नहीं होता है, तो यह या तो अम्लीय या आसवित जल है। इस प्रकार, क्षार विलयन की आसानी से पहचान की जा सकती है।

A, B और C के रूप में तीन परखनलियों को चिह्नित करें। A में से विलयन की एक बूंद लाल लिटमस पेपर पर डालते हैं। विलयन B और C के साथ भी यही दोहराते हैं। यदि इनमें से कोई भी लाल रंग को नीले रंग में परिवर्तित करता है, तो यह क्षार है। इसप्रकार, तीन में से, एक की पहचान हो गई है।

शेष दो में से कोई भी अम्लीय या आसवित जल हो सकता है। अब क्षार विलयन की एक बूंद शेष दो विलयनों में से प्रत्येक की एक बूंद के साथ मिश्रित करते हैं और फिर मिश्रण की बूंदों की प्रकृति की जांच करते हैं। अगर मिश्रण का रंग नहीं बदलता है, तो दूसरा दूसरा विलयन आसवित जल है और अगर रंग में कोई परिवर्तन होता है, तो दूसरा विलयन अम्लीय है। क्योंकि अम्लीय और क्षारीय विलयन एक-दूसरे को बेअसर कर देते हैं।

इस प्रकार, हम तीन प्रकार के विलयनों के बीच भेद कर सकते हैं।


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प्रश्न 1: पीतल एवं ताँबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?

उत्तर 1: दही और अन्य खट्टे पदार्थों में अम्ल होता है। इसलिए, जब उन्हें पीतल एवं ताँबे के बर्तनों में रखा जाता है, तो अम्ल धातु से क्रिया करके हानिकारक उत्पाद (लवण) बनाता है, जिससे भोजन खराब हो जाता है और खाने योग्य नहीं रहता है।


प्रश्न 2: धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन सी गैस निकलती है? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे?

उत्तर 2: धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः हाइड्रोजन गैस निकलती है। 

एक परखनली में लगभग तनु सल्फ्यूरिक अम्ल लेकर उसमें दानेदार जिंक के कुछ टुकड़े डालने पर उसमें से गैस उत्सर्जित होने लगती है। जब इस गैस को साबुन के विलयन से प्रवाहित किया जाता है तो साबुन के विलयन में बुलबुले बनने लगते हैं। जलती हुई मोमबत्ती गैस के पास लाने पर यह फट – फट की ध्वनि के साथ जलने लगती है। इससे पता चलता है कि यह गैस हाइड्रोजन गैस है।

( किताब से  चित्र 2.1 देखकर बनाइए )

प्रश्न 3: कोई धातु यौगिक ‘A’ तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है तो बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे उत्पन्न गैस जलती मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में से एक कैल्सियम क्लोराइड हैं, तो इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए। 

उत्तर 3:         CaCO3         +     2HCl           →      CaCl2       +    CO2        +    H2O 

               कैल्शियम कार्बोनेट     हाइड्रोक्लोरिक अम्ल           कैल्शियम क्लोराइड   कार्बन डाइऑक्साइड      जल



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प्रश्न 1: HCI, HNO3 आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण क्यों प्रदर्शित करते हैं, जबकि ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों के विलयनों में अम्लीयता के अभिलक्षण नहीं प्रदर्शित होते है?

उत्तर 1: HCI, HNO3 आदि जलीय विलयन में विघटित होकर हाइड्रोजन आयन (H+) उत्पन्न करते हैं। हाइड्रोजन आयन (H+) स्वतंत्र रूप में नहीं रह सकते हैं। ये जल के अणुओं के साथ मिलकर हाइड्रोनियम आयन (H3O+) बनाते है। इन्हीं आयनों के बनाने से HCI, HNO3 आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण प्रदर्शित करते हैं।

HCl   +   जल   →   H+   +   Cl-

H+    +    H2O  →   H3O+

ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों के विलयनों में हाइड्रोजन आयन (H+) या हाइड्रोनियम आयन (H3O+) का अभाव होता है। इसलिए ये अम्लीयता के अभिलक्षण प्रदर्शित नहीं करते हैं।


प्रश्न 2: अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है? 

उत्तर 2: जलीय विलयन में विद्युत धारा का प्रवाह आयनों द्वारा होता है। अम्ल जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H+) उत्पन्न करता है। इसी कारण अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन करता है।


प्रश्न 3: शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को क्यों नहीं बदलती है? 

उत्तर 3: अम्ल जलीय विलयन में विघटित होकर हाइड्रोजन आयन (H+) उत्पन्न करते हैं जो उनकी अम्लीयता के अभिलक्षण को प्रदर्शित करते हैं। शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस और शुष्क लिटमस पत्र दोनों में ही जल का अभाव होने के कारण हाइड्रोजन आयन उत्पन्न नहीं हो पाते हैं। इसलिए शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को नहीं बदलती है।


प्रश्न 4: अम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए न कि जल को अम्ल में? 

उत्तर 4: जल में अम्ल के घुलने की प्रक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी होती है। सांद्र अम्ल में जल मिलाने पर उत्पन्न हुई ऊष्मा के कारण मिश्रण आस्फलित होकर बाहर आ सकता है तथा कोई भी जल सकता है। साथ ही अत्यधिक स्थानीय ताप के कारण प्रयोग में उपयोग किया जा रहा काँच का पात्र भी टूट सकता है। इसलिए अम्ल को सदैव धीरे – धीरे तथा जल को लगातार हिलाते हुए जल में मिलाना चाहिए।


प्रश्न 5: अम्ल के विलयन को तनुकृत करते समय हाइड्रोनियम आयन (H3O+) की सांद्रता कैसे प्रभावित हो जाती है? 

उत्तर 5: अम्ल के विलयन को तनुकृत करते समय हाइड्रोनियम आयन (H3O+) की सांद्रता कम होने लगती है। जैसे-जैसे हम उसमे जल की मात्रा बढ़ाते है, उसमें प्रति इकाई आयतन में हाइड्रोनियम आयन (H3O+) की मात्रा कम होने लगती है और अम्ल की अम्लीयता घट जाती है।


प्रश्न 6: जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाते है तो हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) की सांद्रता कैसे प्रभावित होती है?

उत्तर 6: क्षार में हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) की सांद्रता अधिक होती है। इसलिए जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाते है तो हाइड्रॉक्साइड आयन (OH-) की सांद्रता और अधिक हो जाती है।


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प्रश्न 1: आपके पास दो विलयन ‘A’ एवं ‘B’ हैं। विलयन ‘A’ के pH का मान 6 है एवं विलयन ‘B’ के pH का मान 8 है। किस विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है? इनमें से कौन अम्लीय है तथा कौन क्षारीय?

उत्तर 1: यदि विलयन के pH का मान 7 से अधिक है तो वह क्षारीय है और यदि pH का मान 7 से कम है तो वह अम्लीय है। इसलिए विलयन ‘A’ अम्लीय है और विलयन ‘B’ क्षारीय है। अम्लीय विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक होती है इसलिए विलयन ‘A’ में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है।


प्रश्न 2: H+(aq) आयन की सांद्रता का विलयन कि प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है? 

उत्तर 2: H+ (aq) आयन की सांद्रता बढ़ने पर विलयन की अम्लीयता बढ़ती है और H+ (aq) आयन की सांद्रता कम होने पर अम्लीयता कम होती है अथवा क्षारीयता बढ़ती है।


प्रश्न 3: क्या क्षारकीय विलयन में H+ (aq) आयन होते हैं? अगर हाँ, तो यह क्षारकीय क्यों होते है? 

उत्तर 3: क्षारकीय विलयन में H+ (aq) आयन भी होते हैं परन्तु इनकी सांद्रता OH-(aq) आयन की सांद्रता से बहुत कम होती है।  OH-(aq) आयन की सांद्रता अधिक होने के कारण ही ये क्षारीय होते है।


प्रश्न 4: कोई किसान खेत की मृदा की किस परिस्थिति में बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट) का उपयोग करेगा?

उत्तर 4: यदि खेत की मृदा अम्लीय है तो वह खेती योग्य नहीं होती है। खेत में अम्लीयता को कम करने के लिए उसमे क्षार मिलाया जाता है। यहाँ किसान बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट) का उपयोग कर रहा है अर्थात उसके खेत की मृदा अम्लीय है।


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प्रश्न 1: CaOCl2 यौगिक का प्रचलित नाम क्या है? 

उत्तर 1: CaOCl2 यौगिक का प्रचलित नाम विरंजक चूर्ण है।


प्रश्न 2: उस पदार्थ का नाम बताइए जो क्लोरीन से क्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है। 

उत्तर 2: शुष्क बुझा हुआ चूना [Ca(OH)2] क्लोरीन से क्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है। 

Ca(OH)2     +    Cl2   →   CaOCl2    +    H20 

       बुझा हुआ चूना       क्लोरीन        विरंजक चूर्ण        जल


प्रश्न 3: कठोर जल को मृदु करने के लिए किस सोडियम यौगिक का उपयोग किया जाता है? 

उत्तर 3: कठोर जल को मृदु करने के लिए सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3.10H2O धोने का सोडा) का उपयोग किया जाता है।

         

प्रश्न4: सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए। 

उत्तर 4: सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर यह सोडियम कार्बोनेट, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनता है।

2 NaHCO3       (ऊष्मा)  →      Na2CO3   +   H20   +   C02

सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट    सोडियम कार्बोनेट   जल      कार्बन डाइऑक्साइड


प्रश्न 5: प्लास्टर ऑफ पेरिस की जल के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए। 

उत्तर 5: प्लास्टर ऑफ पेरिस [CaSO4.12H2O] जल के साथ अभिक्रिया करके जिप्सम [CaSO4.2H2O] बनता है।


CaSO4.12H2O   +  112H2O    →    CaSO4.2H2O

                                  प्लास्टर ऑफ पेरिस           जल                  जिप्सम 


अभ्यास 

प्रश्न 1: कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH संभवतः क्या होगा? 

(a) 1 (b) 4 (c)5 (d) 10 

उत्तर 1: (d) 10 क्योंकि क्षार लाल विलयन को नीला कर देता है और क्षार विलयनों के pH का मान 7 से अधिक होता है। 


प्रश्न 2: कोई विलयन अंडे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया कर एक गैस उत्पन्न करता है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। इस विलयन में क्या होगा? (a) NaCl (b) HCl (c) LiCl (d) KCI

उत्तर 2: (b) HCI क्योंकि अंडे के पिसे हुए कवच में कैल्शियम कार्बोनेट [CaCO3] होता है जो HCL से क्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करता है। कार्बन डाइऑक्साइड गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है।

           CaCO3     +   HCL     →      CaCl2     +    H2O  +  CO2 


प्रश्न 3: NaOH का 10 mL विलयन, HCI के 8ml विलयन से पूर्णतः उदासीन हो जाता है। यदि हम NaOH के उसी विलयन का 20 ml लें तो इसे उदासीन करने के लिए HCI के उसी विलयन की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी? (a) 4 ml (b) 8 ml (c) 12 ml  (d) 16 ml

उत्तर 3: (d) 16 ml क्योंकि जिस अनुपात में क्षार है उसी अनुपात में अम्ल मिलाने से विलयन पूर्णतः उदासीन हो जाता है।


प्रश्न 4: अपच का उपचार करने के लिए निम्न में से किस औषधि का उपयोग होता है? 

(a) एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक) (b) एनालजेसिक (पीड़ाहारी) (c) ऐन्टैसिड  (d) एंटीसेप्टिक (प्रतिरोधी)

उत्तर 4: (c)  ऐन्टैसिड, क्योंकि ऐन्टैसिड पेट में अम्ल की अधिकता को कम करता है।


प्रश्न5: निम्न अभिक्रिया के लिए पहले शब्द-समीकरण लिखिए तथा उसके बाद संतुलित समीकरण लिखिए:

(a) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है। 

(b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है। 

(c) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है। 

(d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लौह के रेतन के साथ अभिक्रिया करता है।


उत्तर 5: (a) सल्फ्यूरिक अम्ल + जिंक  →  जिंक सल्फेट + हाइड्रोजन 

                     H2SO4(aq) + Zn(s)  →  ZnSO4(aq) + H2(g) 

(b) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + मैग्नीशियम  →  मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन 

                     2HCl(aq) + Mg(s)    →   MgCl2(aq) + H2(g) 

(c) सल्फ्यूरिक अम्ल + ऐलुमिनियम   →  ऐलुमिनियम सल्फेट + हाइड्रोजन 

         3H2SO4(aq) + 2Al(s)      →   Al2(SO4)3(aq) + 3H2(g) 

(d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + लोहा   →  फेरिक क्लोराइड + हाइड्रोजन 

                6HCl(aq) + 2Fe(s)  →   2FeCl3(aq)   + 3H2(g) 


प्रश्न 6: ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे साबित कीजिए।


उत्तर 6: एक कार्क पर दो कीलें लगाकर कार्क को के बीकर में रख दीजिए। चित्र के अनुसार कीलों को वोल्ट की एक बैटरी के दोनों टर्मिनलों के साथ एक बल्ब तथा स्विच के माध्यम से जोड़ दीजिए। अब बीकर में थोड़ा सा तनु अम्ल विलयन डालकर विद्युत धारा प्रवाहित कीजिए।

इस क्रिया को ऐल्कोहॉल विलयन या ग्लूकोज विलयन के साथ अलग – अलग दोहराएँ। हम देखते हैं कि बल्ब केवल तनु अम्ल की स्थिति में ही जलता है। इससे यह पता चलता है कि ग्लूकोज और ऐल्कोहॉल की स्थिति में विद्युत प्रवाह नहीं होता है क्योंकि यह विलयन में हाइड्रोजन आयन नहीं उत्पन्न कर पाता है।

                             (  किताब से चित्र 2.3 बनाइए ) 


प्रश्न 7: आसवित जल विद्युत का चालक क्यों नहीं होता जबकि वर्षा जल होता है? .

उत्तर 7: आसवित जल एक रूप है और यह किसी भी प्रकार आयनों से मुक्त होता है। विद्युत के संचालन के लिए आयनों की आवश्यकता होती है इसलिए, यह विद्युत का संचालन नहीं करता है। जबकि वर्षा का जल शुद्ध नहीं होता है। इसमें वातावरण की आंशिक अशुद्धियाँ मिली हुई होती है। अतः यह विद्युत का संचालन करता है।


प्रश्न 8: जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है? 

उत्तर 8: अम्ल जलीय विलयन में विघटित होकर हाइड्रोजन आयन (H+) उत्पन्न करते हैं जो उनकी अम्लीयता के अभिलक्षण को प्रदर्शित करते हैं। जल की अनुपस्थिति के कारण हाइड्रोजन आयन उत्पन्न नहीं हो पाते हैं। इसलिए जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय नहीं होता है।


प्रश्न 9: पाँच विलयनों A, B, C, D, व E की जब सार्वत्रिक सूचक से जाँच की जाती है तो pH के मान क्रमशः 4, 1,11,7 एवं 9 प्राप्त होते हैं। कौन सा विलयन:

 (a) उदासीन है? (b) प्रबल क्षारीय है? (c) प्रबल अम्लीय है? (d) दुर्बल अम्लीय है? (e) दुर्बल क्षारीय हैं।

pH के मानों को हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए। 

उत्तर 9: 

(a) उदासीन है – विलयन D जिसका pH का मान 7 है। 

(b) प्रबल क्षारीय है – विलयन C जिसका pH का मान 11 है। 

(c) प्रबल अम्लीय है – विलयन B जिसका pH का मान 1 है। 

(d) दुर्बल अम्लीय है – विलयन A जिसका pH का मान 4 है। 

(e) दुर्बल क्षारीय हैं – विलयन E जिसका pH का मान 9 है।

 pH के मानों का हाइड्रोजन आयन की सांद्रता का आरोही क्रम 11 <9<7<4< 1 है


प्रश्न 10: परखनली ‘A’ एवं ‘B’ में समान लंबाई की मैग्नीशियम की पट्टी लीजिए। परखनली ‘A’ में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) तथा ‘B’ में ऐसिटिक अम्ल (CH3COOH) डालिए। दोनों अम्लों की मात्रा तथा सांद्रता समान हैं। किस परखनली में अधिक तेज़ी बुदबुदाहट होगी तथा क्यों?

उत्तर 10: परखनली ‘A’ में, (जिसमे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है) अधिक तेज़ी से (हाइड्रोजन गैस निकलने के कारण) बुदबुदाहट होगी क्योंकि हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, ऐसिटिक अम्ल से अधिक क्रियाशील अम्ल है।


प्रश्न 11: ताज़े दूध के pH का मन 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा? अपना उत्तर समझाइए।   

उत्तर 11: दही, दूध से अधिक अम्लीय होती है इसलिए दही के pH का मान 6 से कम होगा।


प्रश्न 12:एक ग्वाला ताज़े दूध में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलता है। 

(a) ताज़ा दूध के pH के मान को 6 से बदलकर थोड़ा क्षारीय क्यों बना देता है? 

(b) इस दूध को दही बनने में अधिक समय क्यों लगता है?

उत्तर 12:

(a) जब दूध अधिक अम्लीय हो जाता है तो वह खाने पीने योग्य नहीं रहता है। ताजा दूध समय के साथ – साथ अम्लीय होता रहता है। इसलिए ग्वाला ताजे दूध में थोडा बेकिंग सोडा (क्षार) मिला देता है ताकि दूध अम्लीय होने में अधिक समय ले और ज्यादा समय तक दूध सुरक्षित रहे।

(b) यह दूध, ताजे दूध से अधिक क्षारीय है। इसलिए इस दूध को दही (अम्लीय) बनने में अधिक समय लगता है।


प्रश्न 13: प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्र-रोधी बर्तन में क्यों रखा जाना चाहिए। इसकी व्याख्या कीजिए। 

उत्तर 13: प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्र-रोधी बर्तन में इसलिए रखा जाना चाहिए क्योंकि प्लास्टर ऑफ पेरिस आर्द्रता (जल) से अभिक्रिया करके जिप्सम बनता है। 

CaSO4.12H2O   +  112H2O    →    CaSO4.2H2O

                                  प्लास्टर ऑफ पेरिस           जल                  जिप्सम 


प्रश्न 14: उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए। 

उत्तर 14: जब कोई क्षार, अम्ल से अभिक्रिया करता है तो लवण तथा जल बनता है। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण: सोडियम हाइड्रोक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके साधारण नमक तथा जल बनाता है।

NaOH    +     HCI     →    NaCl + H2O 

मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम क्लोराइड तथा जल बनता है। 

    Mg(OH)2   +  2HCl    →   MgCl2  +  2H2O 


प्रश्न 15:धोने का सोडा एवं बेकिंग सोडा के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए।

उत्तर 15: धोने का सोडा के दो प्रमुख उपयोग

» इसका उपयोग काँच, साबुन तथा कागज उद्योगों में होता है।

> इसका उपयोग घरों में साफ-सफाई के लिए होता है। 

बेकिंग सोडा के दो प्रमुख उपयोग

» इसका उपयोग सोडा – अम्ल अग्निशामक में भी किया जाता है। 

» इसका उपयोग खाने की चीजों को मुलायम तथा स्पंजी बनाने के लिए किया जाता है।


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